जो पहले पता होता तुम्हारे वास्ते ऐसा हश्र होगा मेरे नसीब का दिल लगाने की कभी कोशिश नहीं करता
आजकल तुम्हारी बातों में तुम्हारे इरादे साफ छलकते हैं ऐसा महसूस होता है मुझे बर्बाद करने की कोई साजिश रच रही हो
उसके रूठ जाने का जिम्मेदार मैं हूं उसके जिद पर थोड़ा ध्यान देने की जरूरत थी और बेवजह लड़ाई कर बैठा
मेरे दिल की ख्वाहिश है तुम्हारे प्यार के समंदर में डूब जाने की इंतजार है कोई इशारा मिले
Comments
Post a Comment